अनियमित पीरियड्स: अनियमित मासिक धर्म के कारण, लक्षण और घरेलू उपचार

अनियमित पीरियड्स: माहवारी से जुड़ी छोटी-मोटी दिक्कते होना आम बात है। यह परेशानियां आमतौर पर हार्मोनल इम्बैलेंस यानि हार्मोन असंतुलन के कारण होती हैं। एक सही मासिक चक्र की अवधि लगभग 28 दिनों की होती है, जिन महिलाओं या लड़कियों को 29वें दिन पर पीरियड्स या मासिक धर्म हो जाते हैं, तो उनका मासिक चक्र एकदम सही होता है।

लेकिन अगर किसी महिला या किशोरी को 21 दिनों में या उससे पहले मासिक धर्म शुरू हो जाते हैं और उनकी माहवारी 8 दिनों से अधिक समय तक चलती है, तो आप अनियमित मासिक धर्म की समस्या से ग्रस्त हैं। यहां पीरियड्स को रेगुलर करने के कुछ घरेलू तरीकों के बारे में बतायेंगे|

अनियमित पीरियड्स अवधि क्या है?

सामान्यत: मासिक धर्म के चक्र की औसत अवधि 28 दिनों की मानी जाती हैं| यदि आपका मासिक चक्र 28 दिनों से छोटा या लंबा है, तो आपके मासिक धर्म अनियमित मान सकते हैं।

लेकिन यहां ध्यान रखने योग्य बात यह हैं कि अनियमित पीरियड्स तब होते हैं जब मासिक चक्र की अवधि 35 दिनों से अधिक या 21 दिनों से कम होती है। इसके बीच आने वाली कोई भी अन्य संख्या सामान्य मानी जाती है।

मासिक धर्म अनियमित होने के कारण (Causes of Irregular Periods)

करीब 35 प्रतिशत महिलाओं को अनियमित पीरियड्स की परेशानियों का सामना करना पड़ता है|वैसे तो अनियमित पीरियड्स के कई कारण हो सकते हैं, जिनसे ज्यादा घबराने की जरूरत नही हैं। ज्यादातर अनियमित माहवारी की परेशानी किशोरावस्था में लड़कियों को होती है, जिनमें मासिक धर्म की बस शुरुआत ही हुई होती हैं। अनियमित पीरियड्स के कई सामान्य कारण हो सकते हैं जैसे-

  • हार्मोन्स का असंतुलन
  • वजन का अचानक बढना या घटना
  • ज्यादा तनाव या चिंता
  • गर्भनिरोधक गोलियों का उपयोग करना
  • जीवनशैली में बदलाव
  • भोजन में पोषण की कमी
  • थायरॉइड
  • मेनोपाॅज के महीनों में
  • ज्यादा एक्सरसाइज़
  • बर्थ कंट्रोल पिल्स

अनियमित पीरियड्स के लक्षण (Irregular Periods Symptoms)

  • यूटेरस में दर्द होना
  • कमर, पैर-हाथ और स्तनों में दर्द होना
  • भूख कम लगना
  • थकान महसूस होना
  • यूट्रस में ब्लड क्लॉट्स का बनना
  • मासिक धर्म चक्र की लंबाई 35 दिनों से अधिक हो जाना
  • लगातार 3 से अधिक चक्र चूकना
  • थक्के या धब्बे के साथ भारी रक्तस्राव
  • पेट में ऐंठन और पीठ दर्द

अनियमित पीरियड्स के लिए प्रभावी घरेलू उपचार (Home Remedies for Irregular Periods)

सबसे जरूरी, संतुलित और पौष्टिक आहार लें। हार्मोनल बैलेंस के लिए एक अच्छी डाइट बहुत जरूरी होती है। एक स्वस्थ जीवनशैली का पालन करें| तनाव मुक्त रहें|

  • योगाभ्यास करें|
  • वजन नियंत्रित रखें|
  • रोजाना व्यायाम करें|
  • विटामिन्स की खुराक लें|

अदरक की चाय

अनियमित पीरियड्स तथा अन्य कई प्रकार की बीमारियों में अदरक का सेवन फायदेमंद होता है। कच्चे अदरक का रोजाना सेवन आपके अनियमित पीरियड्स को नियमित करने में मदद कर सकता है। अदरक में जिंजरोल पाया जाता है जो शरीर में सूजन को कम करने में सहायता करता है।

यह गर्भाशय की मांसपेशियों को सिकुड़ने में मदद करता है और हार्मोन्स को संतुलित करता है। एक कप अदरक की चाय में थोड़ा सा नींबू का रस और एक चुटकी शहद मिलाकर सुबह या शाम के समय खाली पेट पीने से मेटाबॉलिज्म बढ़ता है।

कच्चा पपीता

कच्चा पपीता तनाव और मेनोपाॅज के कारण होने वाली मासिक धर्म की समस्याओं में फायदेमंद है। कच्चे पपीते में मौजूद आयरन, कैरेटिन, कैल्शियम, विटामिन ए और सी, गर्भाशय की सिकुड़ी हुई मांसपेशियों को फाइबर पहुंचाने का काम करते हैं। कच्चे पपीते को आप नाश्ते के रूप में या जूस बनाकर उपयोग कर सकते हैं|

गुड़

गुड़ मीठा होता है और इसमें ढेर सारे औषधीय गुण होते हैं। गुड़ का नियमित सेवन अनियमित पीरियड्स को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है। यह गर्भाशय की ऐंठन को कम करने में भी सहायक है।

हल्दी

हल्दी का सेवन स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभदायक है। यह एक बहुत ही कारगर घरेलू उपाय है जिसे हम किसी भी हालत में इस्तेमाल कर सकते हैं। हल्दी का नियमित सेवन अनियमित पीरियड्स को नियंत्रित करने में सहायता कर सकता है। इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-स्पास्मोडिक गुण भी होते हैं जो गर्भाशय की ऐंठन को कम करने में मदद करते हैं। यदि आप अपने पीरियड्स को सामान्य तरीके से नियमित करना चाहती हैं, तो हल्दी को गर्म दूध और शहद के साथ मिलाकर पियें। पीरियड्स आने तक हल्दी के दूध का रोजाना इस्तेमाल करें|

एलोवेरा

एलोवेरा जूस आपके मासिक धर्म को नियमित करने और अतिरिक्त वजन कम करने में मदद कर सकता है। यह आपके मेटाबॉलिज्म को भी बढ़ाता है और आपके पेट को साफ रखता है। एलोवेरा हार्मोन्स असंतुलन को सही करने और आपके मासिक धर्म को नियमित करने में मदद करता है। लेकिन पीरियड्स के दौरान कभी भी एलोवेरा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिये। क्योकिं यह गर्भाशय को संकुचित कर सकता है।

सेब का सिरका

सेब के सिरके का सेवन करने से पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम वाली महिलाओं में आपके पीरियड्स और हार्मोन को नियमित करने में मदद मिल सकती है। इसके नियमित इस्तेमाल से आप वजन कम कर सकती हैं| इसके अलावा रक्त शर्करा और इंसुलिन के स्तर को कम कर सकते हैं। सेब का सिरके का स्वाद कड़वा होता है, इसलिए आप इसका सेवन शहद के साथ मिलाकर कर सकते हैं।

दालचीनी

दालचीनी हमारे स्वास्थ्य के लिए भी बहुत जरूरी है। इसकी सहायता से गर्भाशय में रक्त के प्रवाह को नियंत्रित किया जा सकता है| यह अनियमित मासिक धर्म का इलाज कर सकता है। इसका सेवन पीरियड्स के दौरान पेट दर्द, मतली और उल्टी को कम करने में मदद कर सकता है। एक गिलास दूध में एक चम्मच दालचीनी पाउडर मिलाकर इसका सेवन करें।

चुकंदर

चुकंदर का सेवन अनियमित पीरियड्स की समस्याओं का ईलाज कर सकता है। चुकंदर में उच्च मात्रा में फोलिक एसिड तथा आयरन पाया जाता है जो रक्त में हीमोग्लोबिन के स्तर को बढ़ाने में सहायक है।

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